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आज के दौर में योग की प्रासंगिकता- अलका मिश्रा

आज के दौर में योग की प्रासंगिकता- अलका मिश्रा

आज जब कि विश्व भर में युद्ध, आतंक, अपराध, भुखमरी और आर्थिक मंदी सुरसा जैसा मुँह बाये खड़ी है। ऐसी विकट एवं तनावपूर्ण परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य एक वैश्विक चिंता बन चुका है।

पतंजलि योगसूत्र: योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः
 
    यह सूत्र पतंजलि योगसूत्र का मूलभूत सिद्धांत है, जो योग की परिभाषा देता है। यहाँ "योग" का अर्थ केवल आसनों या शारीरिक व्यायाम से नहीं है, बल्कि आंतरिक नियंत्रण, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक साधना के रूप में है।
    चित्त मन का वह स्वरूप है जिसमें विचार, भावना, कल्पना, स्मृति, अहंकार आदि समाहित होते हैं। जब यह चित्त संसार के विषयों में उलझा रहता है, तो मन चंचल और अस्थिर हो जाता है। यही वृत्तियाँ हमें दुख, भ्रम, और अशांति की ओर ले जाती हैं। 
    जब चित्त की ये वृत्तियाँ— जैसे राग (आसक्ति), द्वेष (घृणा), भय, मोह, और स्मृति— निरंतर चलती रहती हैं, तो व्यक्ति आत्मस्वरूप को नहीं पहचान पाता। योग का उद्देश्य इन्हीं वृत्तियों को नियंत्रित करना है ताकि आत्मा के साथ साक्षात्कार संभव हो।
    योगाभ्यास (अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से) इन वृत्तियों को शांत करता है। जैसे जब जल में लहरें शांत होती हैं, तब हम तल देख सकते हैं— वैसे ही जब चित्त शांत होता है, तब हम आत्मा के स्वरूप को अनुभव कर सकते हैं। 
यह सूत्र दर्शाता है कि योग केवल शरीर का नहीं, चित्त का शुद्धिकरण है। योग का अंतिम लक्ष्य है— स्वरूपावस्था, अर्थात् अपने वास्तविक आत्मस्वरूप में स्थित होना।
    आज का जीवन तेज़ रफ्तार, तनाव और प्रतिस्पर्धा से भरा हुआ है। सुबह की शुरुआत मोबाइल नोटिफिकेशन से होती है और दिन का अंत थकावट व चिंता के साथ। इस दौड़ में न केवल हमारा शरीर थक जाता है, बल्कि मन भी बेचैन और अशांत हो जाता है। ऐसे में योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि एक जीवनशैली, एक मानसिक शांति का साधन, और एक संतुलन का सूत्र बनकर उभरता है।
    योग का अर्थ केवल शरीर को लचीला बनाना नहीं है, बल्कि तन, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। श्वास पर नियंत्रण, ध्यान और आत्मनिरीक्षण – ये सब योग के ऐसे पहलू हैं जो आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियों– तनाव, चिंता, और अवसाद– से लड़ने में हमारी मदद करते हैं। निरंतर प्रतिस्पर्धा और अपेक्षाओं के बोझ तले दबे व्यक्ति के लिए योग एक विश्रांति का ठिकाना है। इसके अभ्यास से न केवल रक्तचाप और मधुमेह जैसे रोगों में राहत मिलती है, बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और भावनात्मक संतुलन भी विकसित होता है।
  आज जब कि विश्व भर में युद्ध, आतंक, अपराध, भुखमरी और आर्थिक मंदी सुरसा जैसा मुँह बाये खड़ी है। ऐसी विकट एवं तनावपूर्ण परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य एक वैश्विक चिंता बन चुका है। ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि कोई ऐसा जादुई मंत्र मिल जाये जिस से मनुष्य का शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक तीनों दिशाओं में उत्थान हो और उसके शरीर के साथ मन भी स्वस्थ बने। क्योंकि एक स्वस्थ मस्तिष्क वाला मनुष्य ही स्वस्थ परिवार को विकसित कर सकता है और जब बच्चे स्वस्थ वातावरण में पलेंगे बढ़ेंगे और बचपन से ही योग युक्त स्वस्थ दिनचर्या का पालन करेंगे तो निश्चित ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण होगा और जब समाज स्वस्थ मानसिकता वाले व्यक्तियों से बनेगा तो सम्पूर्ण विश्व में शांति और सौहार्द्र का वातावरण बनेगा और मानवता का कल्याण होगा। 
 
अनेक शोधों से भी योग की महत्ता पूरे विश्व पर उजागर हो चुकी है इसीलिए योग विश्वभर में स्वीकार किया जा रहा है– न केवल भारतीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में, बल्कि एक वैज्ञानिक और सार्वभौमिक समाधान के रूप में भी।
विश्व योग दिवस का वैश्विक उत्सव इस बात का प्रमाण है कि योग आज केवल भारत की धरोहर ही नहीं, बल्कि विश्व की आवश्यकता बन गया है।
इसलिए, यह समय की माँग है कि हम योग को केवल किसी विशेष दिन तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने दैनिक जीवन का अनिवार्य यंग बनाएँ। यही हमारी मानसिक और शारीरिक मुक्ति की दिशा में पहला कदम होगा। इसी के द्वारा वैश्विक शांति स्थापना कि दिशा में भी सफलता मिल सकती है। 
 
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रचनाकार परिचय

अलका मिश्रा

ईमेल : alkaarjit27@gmail.com

निवास : कानपुर (उत्तर प्रदेश)

जन्मतिथि-27 जुलाई 1970 
जन्मस्थान-कानपुर (उ० प्र०)
शिक्षा- एम० ए०, एम० फिल० (मनोविज्ञान) तथा विशेष शिक्षा में डिप्लोमा।
सम्प्रति- प्रकाशक ( इरा पब्लिशर्स), काउंसलर एवं कंसलटेंट (संकल्प स्पेशल स्कूल), स्वतंत्र लेखन तथा समाज सेवा
विशेष- सचिव, ख़्वाहिश फ़ाउण्डेशन 
लेखन विधा- ग़ज़ल, नज़्म, गीत, दोहा, क्षणिका, आलेख 
प्रकाशन- बला है इश्क़ (ग़ज़ल संग्रह) प्रकाशित
101 महिला ग़ज़लकार, हाइकू व्योम (समवेत संकलन), 'बिन्दु में सिन्धु' (समवेत क्षणिका संकलन), आधुनिक दोहे, कानपुर के कवि (समवेत संकलन) के अलावा देश भर की विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं यथा- अभिनव प्रयास, अनन्तिम, गीत गुंजन, अर्बाबे कलाम, इमकान आदि में रचनाएँ प्रकाशित।
रेख़्ता, कविता कोष के अलावा अन्य कई प्रतिष्ठित वेब पत्रिकाओं हस्ताक्षर, पुरवाई, अनुभूति आदि में रचनाएँ प्रकाशित।
सम्पादन- हिज्र-ओ-विसाल (साझा शेरी मजमुआ), इरा मासिक वेब पत्रिका 
प्रसारण/काव्य-पाठ- डी डी उत्तर प्रदेश, के टी वी, न्यूज 18 आदि टी वी चैनलों पर काव्य-पाठ। रेखता सहित देश के प्रतिष्ठित काव्य मंचों पर काव्य-पाठ। 
सम्मान-
साहित्य संगम (साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक) संस्था तिरोड़ी, बालाघाट मध्य प्रदेश द्वारा साहित्य शशि सम्मान, 2014 
विकासिका (साहित्यिक सामजिक एवं सांस्कृतिक) संस्था कानपुर द्वारा ग़ज़ल को सम्मान, 2014
संत रविदास सेवा समिति, अर्मापुर एस्टेट द्वारा संत रवि दास रत्न, 2015
अजय कपूर फैंस एसोसिएशन द्वारा कविवर सुमन दुबे 2015
काव्यायन साहित्यिक संस्था द्वारा सम्मानित, 2015
तेजस्विनी सम्मान, आगमन साहित्य संस्था, दिल्ली, 2015
अदब की महफ़िल द्वारा महिला दिवस पर सम्मानित, इंदौर, 2018, 2019 एवं 2020
उड़ान साहित्यिक संस्था द्वारा 2018, 2019, 2021 एवं 2023 में सम्मानित
संपर्क- एच-2/39, कृष्णापुरम
कानपुर-208007 (उत्तर प्रदेश) 
 
मोबाइल- 8574722458