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डॉ० परमेश्वर गोयल की क्षणिकाएँ

डॉ० परमेश्वर गोयल की क्षणिकाएँ

वरिष्ठ क्षणिकाकार डॉ० परमेश्वर गोयल उर्फ़ काका बिहारी जी की क्षणिकाओं का मुख्य विषय राजनीतिक एवं सामाजिक विद्रूपताओं का निर्भीक अंकन है। एक कवि का वास्तविक उत्तरदायित्व निभाते हुए वे विसंगतियों पर करारी चोट करते हैं और स्पष्ट शब्दों में बग़ैर लाग-लपेट के झूठ का पर्दाफ़ाश करते हैं। उनकी क्षणिकाओं में आम आदमी के आक्रोश का गहन स्वर है, तो पीड़ा और संवेदना की समर्थपूर्ण अभिव्यक्ति भी। उनके क्षणिका-काव्य में निहित व्यापक भावबोध और बिम्ब मनुष्य को मानवीय मूल्यों के प्रति अडिग रहने के लिए प्रेरित करते हैं।

उनके अब तक ग्यारह क्षणिका-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ० गोयल की क्षणिकाएँ समाज की वर्तमान स्थिति पर एक तीखी टिप्पणी है, जो समाज की विभिन्न समस्याओं को उजागर करती हैं। इन क्षणिकाओं में समाज की अव्यवस्था, अंधकार और पतन की स्थिति को दर्शाया गया है, जहाँ लोग अपनी संस्कृति और मूल्यों को त्यागकर विदेशी संस्कृति को अपनाने में लगे हैं। डॉ० गोयल की क्षणिकाओं में एक संदेश भी है, जो हमें अपनी संस्कृति और मूल्यों को बचाने के लिए प्रेरित करता है। हमें अपनी संस्कृति को त्यागने के बजाय, उसे अपनाना चाहिए और समाज को एक बेहतर दिशा में ले जाना चाहिए। इन क्षणिकाओं का पैना यथार्थ-बोध न्यूनतम शब्दों में अधिकतम अर्थ-घनत्व समाहित किये हुए है। वे शाश्वत मानवीय मूल्यों के क्षणिकाकार हैं, जिनके केन्द्र-बिन्दु में मनुष्यता की पुनर्स्थापना है। वे राजनीति, समाज तथा धर्म में व्याप्त कुरूपता और आडम्बर पर ठोस प्रहार करते हैं।

- डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर

कोमल सूत की
नाज़ुक डोर
निरन्तर रगड़ से
सख़्त शिला का
गुरूर तोड़ती है,
प्रभाव कोमलता
अवश्य छोड़ती है!

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तेरे नये साहब कैसे हैं?
बस पहले जैसे हैं
ये भी जीवन
शानदार जीते हैं,
पति-पत्नी-बच्चे
सभी पीते हैं!

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कल का फ़क़ीरा
आज मस्त है,
धूर्ताई में धुरन्धर
पचाने में व्यस्त है!

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बेधड़क जाइए
बेकार डरते हैं,
वकालत
अब अहिंसा की
बगुले करते हैं!

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पतन की पराकाष्ठा
अव्यवस्था की मूरत है,
चिकित्सालय को
चिकित्सा की
प्रथम ज़रूरत है!

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सड़कें नहीं
बिजली नहीं
रोगियों का क्रन्दन है,
माटी गाँव की
फिर भी चन्दन है!

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कल का सड़क छाप
आज
कार में जाता है,
वह एक
आधुनिक दुकान
विद्या की
अब चलाता है!

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विदेशी भाषा जानना
बुरा नहीं
पर अपनी
संस्कृति को त्यागना
ख़तरे की घंटी है,
नाम अब बच्चों के
बॉबी और बंटी हैं!

1 Total Review

वसंत जमशेदपुरी

03 February 2026

धारदार क्षणिकाएँ हैं आपकी, सादर नमन

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रचनाकार परिचय

परमेश्वर गोयल

ईमेल :

निवास : पूर्णिया (बिहार)

जन्मतिथि- 27 नवंबर, 1934
जन्मस्थान- राजस्थान
प्रकाशन- गद्य एवं पद्य में 28 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित
विशेष- कविताओं पर अनेक शोधकार्य किये जा चुके हैं
सम्पर्क- गुलाब बाग़, पूर्णिया (बिहार)- 854326
मोबाइल- 9304288721