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किशन तिवारी की ग़ज़लें

किशन तिवारी की ग़ज़लें

माफ़ कर देना हमें इतिहास अपनी भूल पर
इस सदी ने बोई जो बतलाओ नफ़रत ठीक है!

ग़ज़ल- 1

पूछते हैं आप क्या, कह दें कि हालत ठीक है
गॉंव साधनहीन हैं, शहरों में दहशत ठीक है

हो गये हैं खेत गिरवी, क़र्ज़ साहूकार का
क्या पसीने या अँगूठे की तिजारत ठीक है

हो गया विद्यालयों का पूर्ण व्यवसायीकरण
और उसमें घोल दी तुमने सियासत, ठीक है

दफ़्तरों, रेलों, बसों में भागता दिन-रात वो
अब नहीं किलकारियाँ सुनने की फ़ुर्सत, ठीक है

माफ़ कर देना हमें इतिहास अपनी भूल पर
इस सदी ने बोई जो बतलाओ नफ़रत ठीक है!

फ़ाइलों पर भावनाएँ दर्ज़ होती ही नहीं
देखकर नक़्शों को तुम कहते हो भारत ठीक है

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ग़ज़ल- 2

चीज़ क्या ये भरी आपकी जेब में
आजकल हैं सभी आपकी जेब में

आपकी सचबयानी को हम क्या कहें
झूठ की डायरी आपकी जेब में

खेत को, गॉंव को जल मिले न मिले
हर नहर, हर नदी आपकी जेब में

हैं परेशान सब बस्तियॉं क्यों जलीं
और माचिस मिली आपकी जेब में

मुल्क टूटे, बने आपकी है अदा
किसने रख दी सदी आपकी जेब में

सारी दुनिया में आतंक है आपका
है हर इक ज़िन्दगी आपकी जेब में

आदमी रोज़ मरकर डरा भी नहीं
वो न आया कभी आपकी जेब में

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रचनाकार परिचय

किशन तिवारी

ईमेल : kishan.young@gmail.com

निवास : भोपाल (म०प्र०)

निवास- 34, सेक्टर 9-A, साकेत नगर, भोपाल (म०प्र०)- 462024
मोबाइल- 9425604488