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जनवरी 2026 के अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

छन्द की पाठशाला- मनोज शुक्ल 'मनुज'

छन्द की पाठशाला- मनोज शुक्ल 'मनुज'

इससे पूर्व के अंकों में आपने सवैया के मत्त गयंद, मोद, अरसात, किरीट, चकोर, मदिरा, सुमुखि, मुक्ताहरा, मंजरी, लवंगलता, सनेही, दुर्मिल, मनुज, सुंदरी, सुखी, अरविन्द, हरीश, गंगोदक, उड़ान, गुरुकुल, मंदारमाला, गोकर्ण, सर्वगामी, रेशमा सवैया, आभार सवैया, शान्ति सवैया, मनोज सवैया, अपराजिता सवैया, श्री दुर्गा सवैया व अदिति सवैया आदि का विधान पढ़ा। इस अंक में हाकलि/मानव, त्रिभंगी, रजनी व विधाता उदाहरण सहित दिए जा रहे हैं।

इस अंक में आप कुछ नए छ्न्द जैसे- हाकलि/मानव, त्रिभंगी, रजनी व विधाता आदि पढ़ेंगे।

1. हाकलि/मानव छंद-

विधान–
1. प्रत्येक चरण में 14 मात्रा होती हैं।
2. चरणान्त में गुरु होता है।
2. तीन चौकल के बाद यदि गुरु हो तो यही छंद मानव छन्द कहलाता है। (4+4+4+2)

उदाहरण–
प्रतिभा का सम्मान करो,
दिन-प्रतिदिन उत्थान करो।
शुचिता को अपनाना है,
जीवन सफल बनाना है।

- मनोज शुक्ल 'मनुज'

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2. त्रिभंगी छन्द

विधान-
1. चार पद
1. प्रत्येक पद में चार चरण
3. 10, 8, 8 व 6 पर यति
4. एक चरण में 32 मात्रा
5. पहले चरण का आरंभ 11 या 2 या 22 या 112 या 1111 से।
6. दूसरे चरण का प्रारंभ दो मात्रिक या 11 हो। यदि शब्द त्रिमात्रिक हो तो 21 हो।
7. तीसरे चरण का पहला शब्द द्विमात्रिक या 11 हो। त्रिमात्रिक हो तो 21 हो।
8. चौथे चरण का आरम्भ 6 मात्रिक हो। उत्तम 3+3
9. पदान्त गुरु। (11 नहीं हो सकता)। अंतिम शब्द गुरु 2।
10. पहले दो चरणों में तुकांतता हो।
11. दो-दो चरण तुकांतता
12. अंतरतुकांतता भी ज़रूरी

उदाहरण-

चलती यह नैया, रुष्ट खिवैया, दूर न मुझसे, अब जाना।
तुमको समझाना, सत्य बताना, तुम ही पूजा, ये जाना।
सब कच्चा-कच्चा, लेकिन सच्चा, मन में जो कुछ, है ठाना।
तुमसे ही है सुख, है डरता दुख, यह सच हमने, अनुमाना।

- मनोज शुक्ल 'मनुज'
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3. रजनी छंद

विधान-

1. चार चरणों का छन्द है।
2. प्रत्येक चरण में 16 वर्ण और 23 मात्राएँ होती हैं।
3. दो-दो पंक्तियों/पदों का तुकांत मिलना चाहिए।

शिल्प- गीतिका--हरिगीतिका--हरिगीतिका--हरिगी
212--11212--11212--112

उदाहरण-

लेखनी कवि की नहीं उनसे कभी डरती,
जो चलें अनरीति से उनको न है वरती।
काम क्या करती बता सब दूँ कहीं तब भी,
आप तो कह दो न ये सच बोलता अब भी।

- मनोज शुक्ल 'मनुज'
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4. विधाता छन्द

विधान-

1. प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं।
2. 14-14 मात्राओं पर यति होती है।
3. प्रत्येक चरण के अंत में एक दीर्घ अथवा दो लघु होने चाहिए।
4. पहली, आठवीं, पन्द्रहवीं और बाईसवीं मात्रा अनिवार्यतः लघु होती है।

शिल्प- 1222--1222--1222--1222

उदाहरण-

कभी ख़ुश हो तभी दुनिया मुझे रंगीन लगती है,
तुम्हें बस देखते ही इक अनोखी प्यास जगती है।
बुरा मानो भला मानो भला क्या दोष है मेरा,
हुई जब तुम हमारी हो सदा को जब हुआ तेरा।

- मनोज शुक्ल 'मनुज'

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रचनाकार परिचय

मनोज शुक्ल 'मनुज'

ईमेल : gola_manuj@yahoo.in

निवास : लखनऊ (उत्तरप्रदेश)

जन्मतिथि- 04 अगस्त, 1971
जन्मस्थान- लखीमपुर-खीरी
शिक्षा- एम० कॉम०, बी०एड
सम्प्रति- लोक सेवक
प्रकाशित कृतियाँ- मैंने जीवन पृष्ठ टटोले, मन शिवाला हो गया (गीत संग्रह)
संपादन- सिसृक्षा (ओ०बी०ओ० समूह की वार्षिकी) व शब्द मञ्जरी(काव्य संकलन)
सम्मान- राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा गया प्रसाद शुक्ल 'सनेही' पुरस्कार
नगर पालिका परिषद गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत सम्मान
भारत-भूषण स्मृति सारस्वत सम्मान
अंतर्ज्योति सेवा संस्थान द्वारा वाणी पुत्र सम्मान
राष्ट्रकवि वंशीधर शुक्ल स्मारक एवं साहित्यिक प्रकाशन समिति, मन्योरा-खीरी द्वारा राजकवि रामभरोसे लाल पंकज सम्मान
संस्कार भारती गोला गोकरन नाथ द्वारा साहित्य सम्मान
श्री राघव परिवार गोला गोकरन नाथ द्वारा सारस्वत साधना के लिए सम्मान
आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा सम्मान
काव्या समूह द्वारा शारदेय रत्न सम्मान
उजास, कानपुर द्वारा सम्मान
यू०पी०एग्री०डिपा०मिनि० एसोसिएशन द्वारा साहित्य सेवा सम्मान व अन्य सम्मान
उड़ान साहित्यिक समूह द्वारा साहित्य रत्न सम्मान
प्रसारण- आकाशवाणी व दूरदर्शन से काव्य पाठ, कवि सम्मेलनों व अन्य साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता
निवास- जानकीपुरम विस्तार, लखनऊ (उ०प्र०)
मोबाइल- 6387863251