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नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

गरिमा सक्सेना के गीत

गरिमा सक्सेना के गीत

बड़े दिनों में भीगे 
और नहाये पेड़
मंद-मंद मुस्काये पेड़
 
इक अरसे से 
धूल भरे थे चित्र सभी
दिखे नहीं थे 
बहुत दिनों से मित्र सभी

गीत- एक
 
जो कुछ परदे में रहना था, सब है परदे पर
घोल रहा जो नित्य रगों में मीठा एक ज़हर
नयी सदी की ख़ातिर ये कैसी सौग़ातें हैं
 
जिसमें सबका हित था, ग़ायब वह साहित्य हुआ
बाज़ारों ने इसे बनाया बिगड़ा हुआ सुआ
नैतिकता को बेच दिया है बंद लिफ़ाफ़ों में
अटका हुआ ध्यान बस सबका बड़े मुनाफ़ों में
बढ़ता देख ट्रेंड कौओं का आज मीडिया पर
कोयल ने भी सीख लिया है काँव-काँव का स्वर
सूर्य बुझा, बल्बों से रौशन दिन औ रातेें हैं
 
गिरने की सीमा का मानक दिन-प्रतिदिन बढ़ता
सदाचार, सद्भाव रो रहे, हँसती फूहड़ता
अपनी गरिमा को, अपने आने वाले कल को
करने होंगे प्रश्न, खोजना ही होगा हल को
ताकि विरासत में दे पायें हम कुछ तो बेहतर
इंटरनेट ने ख़ूब परोसी विकृति गाँव-शहर
मोहरे हम हैं, छल-छद्मों की बिछी बिसातें हैं
 
नव बेलों को सौंप दिया काँटों का अवलम्बन
नहीं सोचते कैसे बढ़ पायेगा घायल मन 
नायक बनकर घूम रहे हैं केवल खलनायक
जो भविष्य को सौंप रहे केवल विष के सायक
स्वार्थ सिद्धि में पारंगत हैं बाज़ारी अजगर
हमें समझना होगा अमरित-विष का अब अंतर
मंत्र क़ैद हैं मुखरित बेमतलब की बातें हैं

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गीत- दो
 
आज तलक भी फटे हुए हैं
प्रेमचंद के जूते
 
'सोजे-वतन' देखकर रोता 
आज देश की हालत 
पूँजी है जन की अधिनायक 
करती कलम वकालत
 
छुई-मुई सब हो जाते हैं
सत्य-मर्म को छूते
 
अब भी गोबर नहीं समझता
झुनिया की लाचारी 
अलगू, जुम्मन रोज़ कर रहे
दंगे की तैयारी 
 
अब भी लाठी जोर दिखाती
फूटतंत्र के बूते
 
बदल-बदल कर रूप सामने
खड़ा पूस का कंबल
होरी का गोदान अभी तक
खोज रहा जीवन-हल
 
प्रासंगिक दुख रहे हमेशा 
पर सुख रहे अछूते
 
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गीत- तीन
 
नभ की नीली आँखों को
कजराने आये
बादल आये, 
तपता मन हर्षाने आये
 
केवल बादल नहीं
आस बनकर छाये हैं
रचनाकार बड़े हैं, 
कुछ रचने आये हैं
सौंधी का उल्लास
गीत हैं हरियाली के
जो ऊसर में रंग भरेंगे
ख़ुशहाली के
 
दुबलायी नदियों का
वेग बढ़ाने आये
 
खेलेंगे बच्चों सँग
काग़ज़ की नावों से
रिश्ते जोड़ेंगे आकर
तपते भावों से
छाएँगे, कजरी गाएँगे
तीज मनेगी
बादल बरसेंगे तो
मन की पीर मिटेगी
 
नभ से मोती भरा 
थाल बिखराने आये
 
इतना भी आसान नहीं है
बादल होना
आसमान को छोड़
धरा में ख़ुद को खोना
ऊँच-नीच को भूल
सभी को गले लगाना
ऊसर, पेड़, नदी, पर्वत
सबका हो जाना
 
क्या है जीवन-अर्थ
हमें समझाने आये
 
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गीत- चार
 
बड़े दिनों में भीगे 
और नहाये पेड़
मंद-मंद मुस्काये पेड़
 
इक अरसे से 
धूल भरे थे चित्र सभी
दिखे नहीं थे 
बहुत दिनों से मित्र सभी
 
कोमल स्पर्शों का 
ज्यों अपनत्व मिला
गले लगाकर 
बूँदों को हर्षाये पेड़
 
शीतलता के 
जागे छंद हवाओं में
नयी ताज़गी 
लौटी पुन: शिराओं में
 
मैले वसन उतारे 
मन की थकन मिटी
पहले  से ज़्यादा ही अब 
हरियाये पेड़
 
खड़े रहे 
होकर मेघों-मल्हारों के 
लौटे दिन फिर 
हँसी-ख़ुशी, त्योहारों के
 
पड़े थपेड़े लू के कितने, 
भूल गये
चौमासे के गीत सुने 
लहराये पेड़
 
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गीत- पाँच 
 
छोड़ो ना लेपटाॅप कि अब तो
बहुत हो चुका काम
आओ हम-तुम साथ बितायें 
ये प्यारी सी शाम
 
 
कंप्यूटर के ग्राफ छोड़ 
जी लो स्पंदन ग्राफ
मेरे चेहरे को भी पढ़ लो
मेरे बेटर हाॅफ
अपनी बोझिल सी आँखों को 
दो थोड़ा आराम
 
रिमझिम बारिश का मौसम है 
साथ पकौड़े-चाय
मौसम भी रचने को आतुर 
कुछ प्रेमिल पर्याय
कुछ पल जी लें आओ
बनकर हम-तुम राधा-श्याम
 
 
अगली-पिछली दुहरायेंगे
आओ मन की बात
इक-दूजे को सौंपेंगे
मुस्कानों की सौगात
वरना रेशा-रेशा जीवन
होता रोज़ तमाम
 

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वसंत जमशेदपुरी

25 July 2025

अप्रतिम गीत

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रचनाकार परिचय

गरिमा सक्सेना

ईमेल : garimasaxena1990@gmail.com

निवास : बैंगलोर (कर्नाटक)

जन्मतिथि- 29 जनवरी, 1990
शिक्षा- बी० टेक (इलेक्ट्राॅनिक्स एंड इन्सट्रयूमेंटेशन)
सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन, कवर डिजायनिंग, चित्रकारी
लेखन विधाएँ- गीत, ग़ज़ल, दोहा, कविता, लघुकथा आदि।
प्रकाशन- दिखते नहीं निशान एवं एक नयी शुरुआत (दोहा संग्रह), हरसिंगार झरे गीतों से (गीत संग्रह), है छिपा सूरज कहाँ पर, कोशिशों के पुल एवं चेहरे का जयपुर हो जाना (नवगीत संग्रह)। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाओं का प्रकाशन।
संपादन- दोहे के सौ रंग (सौ रचनाकारों का सम्मिलित दोहा संकलन) भाग-1एवं 2, यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते।
संवदिया पत्रिका के दोहा विशेषांक का अतिथि संपादन
सम्मान/पुरस्कार- उ०प्र० हिंदी संस्थान द्वारा बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' पुरस्कार, हिन्दुस्तानी अकादमी इलाहाबाद द्वारा युवा लेखन कविता सम्मान, नवगीत साहित्य सम्मान (नवगीतकार रामानुज त्रिपाठी स्मृति) सहित दर्जनों संस्थाओं से सम्मानित।
स्थायी संपर्क- एफ- 652, राजाजीपुरम, लखनऊ (उत्तरप्रदेश)- 226017
वर्तमान संपर्क- मकान संख्या- 212, ए-ब्लाॅक, सेंचुरी सरस अपार्टमेंट, अनंतपुरा रोड, यलहंका, बैंगलोर (कर्नाटक)- 560064
मोबाइल- 7694928448